
मुस्लिम परिवार के घर पाँच वर्षों से विराजीत हो रहे श्रीगणेश
नन्हें आशिक खान की आस्था के सामने पूरा परिवार नतमस्तक, सर्वधर्म समभाव की वर्धा में जीती जागती मिसाल
चंद्रप्रकाश दुबे। वर्धा .
कहा जाता है कि बच्चे ईश्वर के सच्चे और वास्तविक प्रतिनिधि होते हैं। इस बात को साबित कर रहा है वर्धा शहर में रहनेवाला एक महज १३ वर्षीय बालक, जो जन्म से मुस्लिम है, किंतु विगत पाँच वर्षों से अपने घर पर गणेशोत्सव के दौरान ना केवल श्री गणेश प्रतिमा की स्थापना करता है, बल्कि उसका पूरा इस काम में उसका साथ देते हुए दस दिनों तक श्री गणेश पूजन व विसर्जन की विधि पूरे भक्तिभाव से करता है।
मौजूदा दौर में जहां एक ओर देश मे जाति, धर्म व मजहब के नाम पर हद दर्जे की कट्टरता हावी होती दिखार्ई दे रही है, वहीं दूसरी ओर इस तरह के दृश्य या खबरें रेगिस्तान में शीतल हवा के झोकें की तरह महसूस होती है। मिलीये वर्धा शहर के पुलफैल परिसर निवासी नन्हें बालक आशिक खान मकसूद खान पठान (१३) से, जो अपने घर में विगत ५ वर्षो से विघ्रहर्ता श्रीगणेश की स्थापना कर सर्वधर्म समभाव का संदेश दे रहा है।
जानकारी है कि पुलफैल निवासी मकसूद खान पठान के पुत्र आशिक ने ८ वर्ष की आयु में ही श्रीगणेश की स्थापना करने की इच्छा पिता के पास व्यक्त की। इस पर उन्होने भी पुत्र की इच्छा को ध्यान में रखकर जाति धर्म में भेदभाव दूर रखकर उसे प्रोत्साहित किया। प्रथम वर्ष आशिक ने स्वयं ही अपने हाथों से मिट्टी की गणेश प्रतिमा तैयार की निर्माण की और उसे बड़े ही प्यार व भक्तिभाव से उसने घर में स्थापित किया। तब से लेकर अब तक इस परिवार में श्रीगणेशजी की विधिवत पूजा-अर्चना के साथ स्थापना की जा रही है। १० दिनों तक प्रतिदिन आशिक पूरे भक्तिभाव से श्रीगणेश की पूजा-अर्चना करता है। उनके मकान में एक ओर दरगाह है व दूसरी ओर श्रीगणेशजी की स्थापित की गई मूर्ति है, जो एक तरह से दोनों धर्म के लोगों को एकता का संदेश देती नजर आ रही है।
आशिक खान मकसूद खान पठान शहर के शासकीय अभ्यास स्कूल में मराठी माध्यम से कक्षा ७ वीं में अध्ययनरत है और उसके पिता मकसूद खान पठान का परिसर में ही छोटा सा व्यवसाय है, जिसके भरोसे परिवार का गुजरबसर चलता है।
अगर वो चाहेगा, तो ताउम्र विराजेंगे श्री गणेश
इस प्रतिनिधि के साथ बातचीत में आशिक के पिता मकसूद खान पठान ने बताया कि, जिस उम्र में आशिक ने गणपति बिठाने की बात कही, तब उन्हें लगा कि मानों कोई फरिश्ता उनसे कोई फरमाईश कर रहा है और वे उसे टाल नहीं सके। मकसूद भाई के मुताबिक हम ईश्वर कहें या अल्लाह, बात तो एक ही है। खुदा सभी का है और हर जगह है। अपने बेटे की बात को टालकर वे अपने खुदा को नाराज नहीं करना चाहते थे। क्या आपको आपके सजातीय लोगों और धर्मगुरूओं से इस काम के लिए विरोध का सामना नहीं करना पड़ा, इस सवाल पर मकसूद खान ने कहा कि शुरूआती दिनों में ऐसा हुआ था, किंतु उन्होंने हरएक को अपने हिसाब और लिहाज से जवाब दिया। आज भी अगर कोई उनसे इस बात पर चर्चा करना चाहता है, तो, वे आज भी हर बात का जवाब देने तैयार हैं। क्या आगे भी यह सिलसिला ऐसे ही चलता रहेगा या आशिक के बड़े हो जाने के बाद ये सब बंद हो जाएगा, इस सवाल पर मकसूद भाई ने जवाब दिया कि अगर बाप्पा और उसके आशिक की इच्छा रही, तो ये सिलसिला ताऊम्र चलता रहेगा, वे अपनी तरफ से इसमें कभी कोई अड़ंगा नहीं डालेंगे। अगर आशिक की जीवनभर श्रीगणेश प्रतिमा को स्थापना करने की इच्छा रहेगी, तो आगे भी पूरा परिवार इसका पूरा समर्थन करेंगे। पूरी बातचीत के दौरान मकसूद भाई ने कई बार दोहराया कि भगवान सभी के लिए एक हैं, हम उन्हें अपने-अपने हिसाब से बांट रहे हैं। उनके मुताबिक हिंदू या मुसलमान होने से पहले सभी ने एक अच्छा इंसान बनना जरूरी है।
नमस्कार अंकल
शहर में एक मुस्लिम परिवार में श्री गणेश की प्रतिमा स्थापित किए जाने की खबर मिलने के बाद खबर की तस्दीक करने पुलफैल निवासी पठान परिवार के घर पहुंचने पर जैसे ही नन्हें आशिक खान से मुलाकात हुई, उसने दैनिक भास्कर की टीम का बाकायदा दोनों हाथ जोड़कर कहा नमस्कार अंकल। उसकी विनम्रता कायल होने लायक कही जा सकती है। दैनिक भास्कर के साथ बातचीत में इस नन्हें बालक ने बताया कि उसे गणेशोत्सव मनाना अच्छा लगता है और बचपन से ही श्री गणेश की प्रतिमा उसे आकर्षित करती रही है। परिवार से मिले साथ से बेहद अभिभूत और उत्साहित आशिक खान को इस बात का मलाल जरूर है कि चुंकि वह गणेश प्रतिमा स्थापित करता है, इसलिए कुछ लोग उसे कुछ अजीब तरह से देखते और छींटाकशीं करते हैं, लेकिन वे ऐसा क्यों करते हैं, यह उसकी समझ से परे है। साथ ही वह जब अपने अब्बू से इस बारे में पूछता है, तो उसके अब्बू उसे ऐसी बातों पर ध्यान ना देने की सलाह देते हैं।
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