Friday, August 25, 2017

तलाश.... खुशी की....


खुशी.... एक ऐसा शब्द.... जिसकी हर किसी को तलाश है, इसी खुशी के लिए हम सभी नाना जतन करते हैं, हमने इसके लिए दर्जनों तीज त्यौहार सृजित कर रखें हैं, हजारों तरह की सुविधाएं और सहूलियतें खोज ली हैं, पर शायद इन सबके फेर में हम खुशी को कहीं बहुत पीछे छोड़ आए... कहां मिलती है ये खुशी ???? देखिये इन बेहद गरीब और मैले कुचैले बच्चों को.. देखिये इनके मुस्कुराते हुए चेहरों को, शायद आपको इनमें खुशी की एक झलक मिल जाए... किस्सा कुछ ऐसा है कि मौका था गणेशोत्सव पर्व के दौरान गणेश स्थापना के दिन का और मैं हर साल की तरह अपने बच्चों महिमा और प्रगल्भ को लेकर गुरूवार 25 अगस्त को मेरे शहर के सायंसकोर ग्राऊंड पहुंचा, जहां गणेश प्रतिमाएँ विक्री हेतु उपलब्ध होती हैं.. उसी मैदान में शायद घुमंतु समुदाय से वास्ता रखनेवाले ये बच्चे दो रुपये में जनेऊ जोड़ बेच रहे थे. पर चूँकि मैं जनेऊ पहले ही खरीद चुका था, सो मैंने इन बच्चों को मना कर दिया कि मुझे जनेऊ नहीं चाहिए. इसके बाद भी ये टोली हमारे आसपास ही जमी रही और जब मैं अपने बच्चों के लिए सिर पर बांधी जानेवाली गणपति बाप्पा मोरया लिखी हुई केसरिया पट्ट खरीदने लगा, तो इन तीनों बच्चों में से सबसे बड़ेवाले बच्चे ने मुझसे कहा, काका हमें भी दिला दो ना पट्टी. कितनी छोटी सी मांग... हां, मांग ही तो थी, क्योंकि वो खुद्दार बच्चा मुझसे भीख नहीं मांग रहा था, अपने लिये एक छोटी सी खुशी मांग रहा था... ये खुशी शायद मेरी नजर में छोटी थी और उसकी नजर में बहुत बड़ी.. क्योंकि तब सुबह के दस बज रहे थे और बाजार तड़के से सजा हुआ था, ना जाने वह कब से उस पट्टी को अपने सिर पर सजाने की लालसा लिए बैठा था. इसके पहले कि मैं कुछ कहूं, मेरे बच्चों ने ही वो पट्टी खरीदकर उन्हें दी और उसके बाद का नजारा अद्भुत और अभिभूत कर देनेवाला कहा जा सकता है. सबसे बड़े बच्चे ने पहले खुद के माथे पर पट्टी बांध ली, फिर अपने से छोटे दोनों बच्चों को अपने सामने खड़ा कर पट्टी बांधी, बड़े ने मंझले को और मंझले ने छुटके को.. ये पूरा कार्यक्रम होने के बाद उन तीनों के चेहरे पर जो मुस्कान तैरी, शायद उसने मुझे खुशी की गूढ़ और गहन परिभाषा बेहद आसान तरीके से समझा दी.. साथ ही उस समय मेरे बच्चों ने शायद आत्मसंतोष के भाव का अनुभव किया होगा.. शायद इसीलिए कह रहा हूं, क्योंकि मैंने अपने बच्चों पर ये नहीं जाहिर होने दिया कि उन्होंने कोई बहुत बड़ा काम किया है... और ये वाकई कोई बड़ा काम था भी नहीं, अपितु उनका नैतिक व मानवीय दायित्व था... कुल मिलाकर इस गणेशोत्सव को मैं इस खुशी के लिए याद रखूंगा.

Tuesday, August 22, 2017

Where is will, there is a way


Pt. Sattan Ji at Amravati


Master Blaster Sachin at Amravati


Come On Smile


Rahul Gandhi At Amravati


Rahat Indori at Amvarati


World Envoirment Day


An Open Letter to CM Fadanvis


Marvelous Melghat


Vidarbha Master Chef at Amravati


The Human Face Of Amaravati


Tregady In Mahuli Jahangir Village....


KUSA... Kayanat E Urdu Sher O Adab.. Something about Sharing Love


APJ Kakam.. In memory Of Amravati


Our Itians... Good Job Guys


Dahi Handi With Real Govida at Amravati


The Legend.. R.S. Dadasahab Gawai